5 rules of Chanakya niti to get success | चाणक्य निति के ५ नियम सफलता पाने के लिए

लोगो कहते है की चाणक्य पुराने समय के सबसे बुद्धिमान और सबसे बड़े राजकारणी थे और ऐसा वो क्यों कहते है ये में आज में आपको  बताऊंगा चाणक्य निति के ऐसे ५ नियम बताकर जो चाणक्य ने बताये है सफल होने के लिए।

चाणक्य राजा चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन के मुख्य सलाहकार और मंत्री थे और जिन नियमो के बारे में  मै आपको बता रहा  हु  वो उन्हि कि किताब चाणक्य निति में में से बता रहा हु।  और में आपको उन नियमो का आज के समय के हिसाब से क्या  प्रभाव है ये भी सपष्ट करूंगा।

5 rules of Chanakya niti to get success | चाणक्य निति के ५ नियम सफलता पाने के लिए
5 rules of Chanakya niti to get success | चाणक्य निति के ५ नियम सफलता पाने के लिए 


 Chanakya niti rules | चाणक्य निति के नियम 

पहला  नियम 


Nobody should tell their intentions and goals | अपने इरादे और लक्ष्य  किसीको नहीं  बताने चाहिए

चाणक्य कहते है की अपने अच्छे इरादे  और अपने लक्ष्य  किसीको नहीं  बताने चाहिए। और हमारी इन बातो का कभी किसीको पता नहीं चलना चाहिए जैसे ये कोई खुफ़िआ जानकारी हो। और हैरानी की बात ये है की वैज्ञानिक भी यही कहते है की जब हम किसीको अपने लक्ष्य और इरादे बता देते है तो वो पुरे होने की सम्भावना ये काम हो जाती है ऐसा इस वजह से है क्योकि जब हम अपने लक्ष्य के बारे में बताते है तो हमारा दिमाग एक रसायन छोड़ता है जिसका नाम है डोपेमिने

और जब हमें लोग हमरे लक्ष्य और इरादों की तारीफ करते है तो हमारा दिमाग खुश होता है और सोचता है की अब  कुछ करने की जरुरत नहीं बस सबकुछ हो गया है और अब कुछ करने की जरूरत नहीं और इस वजह से हमरी प्रेरणा भी काम हो  जाती है। या तो अगर हम बताये और कोई हमें नकारात्मक बोलदे तो फिर ऐसे में हम नकारात्मक सोचने लगते है और हम अपने सपनो को पाना  भी मुश्किल लगने लगता है।

तो दोनों  तरफ से हमारा नुकसान ही होता है। तो हमें किसीको भी हमारे लक्ष्य और इरादो का पता नहीं चलना देना चाहिए।

दूसरा नियम 

                      छोटी छोटी बूंदो से ही सागर बनता है 

चाणक्य ने बताया है की छोटी छोटी बूंदो से ही सागर बनता है। इसका मतलब है की कोई भी चीज़ एकदम से बड़ी नहीं होती बल्कि वो छोटी छोटी चीज़े मिलकर उसे  बनाती है

 जैसे की अगर कोई कहे की वो एक दिन में ही पूरी पढाई कर लेगा तो ये असंभव है उसे कुछ भी नहीं समझेगा लेकिन अगर हम हर रोज थोड़ा थोड़ा पढ़े तो एकदिन हमारे पास बहोत ज्यादा जानकारी का जाएँगी जितनी हमने कभी सोची भी नहीं होगी।

जैसे की अगर आप एक किताब पढ़ते है तो आपके पास थोड़ी जानकारी होगी पर जब आप अपनी १०० किताब तक पोहचोगे आपके पास कई गुना ज्यादा जानकारी होगी किसी और से। यानि की हमें कभी भी एकदम बड़ा नहीं सोचना चाहिए बल्कि छोटी छोटी जिसे करते रहना चाहिए और एकदिन वोही चीज़े बड़ी हो जाएगी।

तीसरा नियम 

get out of comfort zone आराम क्षेत्र से बाहर निकलें

अगर आपको आराम चाहिए तो आपको ये सोचना बंद करना चाहिए की में कुछ सिख सकता हु। क्योकि अगर आपको आराम चाहिए तो आप कुछ नया नहीं सिख सकते। अगर आपको कुछ सीखना है तो आपको आराम के बारे में सोचना बंद करना होगा क्योकि हर वो चीज़ जो हमें कुछ सिखाये वो हमारे आराम के  यानि  (comfort)  के बाहर  ही होती है   और जब तक हम इस आराम की ज़िन्दगी से बहार न निकले हम कुछ नहीं सीखते।

इसका यही मतलब है की हमें अपने जीवन को आगे बढ़ाते रहना चाहिए सिर्फ उम्र से हम बड़े नहीं होते बल्कि हम अपने काम और विचारो से बड़े होते है इसलिए हमें हमेशा सीखते  जिस वजह से हमरा जीवन अच्छी तरह से आगे बढ़ते रहे

चौथा नियम 

learn from experts | विशेषज्ञों से सीखो 

उसीसे सीखो जो उस चीज़ में  विशेषज्ञ हो अगर आज के हिसाब से कहु तो उसी से कुछ सीखो जो उस चीज़ का सर्वशक्तिशाली बुद्धिमान व्यक्ति हो।  चाणक्य कहते है की शिष्टाचार एक रानी से सीखना चाहिए , अच्छी बाते बोलना एक ज्ञानी से सीखना चाहिए , और झूट बोलना एक जुवारी से सीखना चाहिए। जो भी चीज़ हम सीखना चाहते हो वो हमें विशेषज्ञ से सीखनी चाहिए

उदा: अगर मुझे क्रिकेट सीखना है तो मुझे  किसी अच्छे खिलाडी के पास जाना होगा जो अच्छा क्रिकेट खेलता है नाकि उसके पास जाना चाहिए जो अच्छा फूटबाल खेलता है।

क्योकि हम जो है किसी  राय मांगते है और हम हर किसी की सलाह लेते है यानि अगर कोई गरीब है तो वो आपको बताएगा की आमिर कैसे बनते है मतलब कुछ भी जो खुद गरीब है वो आपको क्या बताएगा की आमिर कैसे होते है फिर भी हम सुनते है। हा अगर कोई आपसे ज्यादा भले ही वो विशेषज्ञ न हो आप उनसे रे और सलाह ले क्योकि उनके पास आपसे ज्यादा जानकारी है  वो जानकारी आपके काम भी आएगी।

और अगर आपको विशेषज्ञों से सीखना है तो इसका सीधा रास्ता है किताबे। जो विशेषज्ञ होते है वो अपनी किताबे लिखते है और हम इन किताबो में से उनसे आसानी से सिख सकते है  अगर आपको उन किताबो के बारे में जानना है तो  क्लिक    करे।

पांचवा नियम 

how to control people | लोगों को कैसे नियंत्रित किया जाए

अगर आपको लोगो पे नियंत्रण पाना है तो आपको ये पता होना चाहिए की उनको कोनसी चीज़ से प्रेरणा मिलती है जैसे की  अगर किसी लालची इंसान पे नियंत्रण करना है तो उसके सामने पैसे रखना पड़ेगा अगर कोई दुखी है तो आप उसे ख़ुशी दे दो वो आपका हर  काम ख़ुशी ख़ुशी कर देगा।  चाणक्य का मानना है की अगर  बेवकूफ व्यक्ति है जिसे दुनिआ के बारे में  पता नहीं तो उसे नियत्रण करने का अलग तरीका है एक बेफकूफ इंसान को आप अगर दुनिआ के बारे में कोई छोटी चीज़ भी सीखा दो या बता दो तो वो ये सोचने लगता है की उसे बहोत ज्यादा ज्ञान मिल गया है और वो आपको एक बुद्धिमान व्यक्ति समझने लगेगा।

और मुझे जो सबसे अच्छी बात लगी जो चाणक्य ने आखिर में कहा है इस पाचवे नियम अगर किसी होशियार इंसान पर नियंत्रण पाना चाहते हो तो उसे सच बतादो क्योकि आप किसी होशियार व्यक्ति को आप अगर कुछ और कहेंगे तो वो आप पे बिलकुल विश्वास नहीं करेगा तो इससे अच्छा है की आप सच बोलदो वो इंसान आप पे विश्वास जरूर करेगा।


और एक बात जो मुझे चाणक्य की बिलकुल पसंद नहीं आयी वो ये है की वो कहते है की धोका देना किसी औरत से सीखना चाहिए इस सोच के बारे में आपकी क्या राय है जरूर कमेंट कर के बताये। और कुछ भी अगर आपको हमसे शेयर करना है तो बिना किसी संकोच के हमें ईमेल कर दे। धन्यवाद 




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