poem in Hindi | poem on nature | Hindi Kavita on life

poem in hindi: poems हमे अच्छे विचारो से जोड़ते है। हर कोई अपने जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता है और बड़ा बनने के लिए हमे अच्छी चीज़े सीखना बहोत जरुरी है। और short poems अच्छी चीज़े सिखने का एक अच्छा रास्ता है। मेरी यही कोशिश है की आपको इन hindi poems से motivation मिले।

short motivational poems in hindi

प्यार का है कर्ज

चिलचिलाती धूप में, बाहर नहीं भेजा

पढ़ाई में तुम्हारी, बहाया पानी सा पैसा

बिटिया तुम्हें हम ने, बड़े नाजों से पाला

फिक्र थी मां को, कहीं काली न पड़ जाओ

शादी के बाजार में, ‘रिजैक्ट’ की जाओ

तभी उस ‘इंजीनियर’ का, रिश्ता आया है

इक्कीसवीं सदी है, समय तेजी से बदला है

हर ओर तुम्हारी ही तरक्की की तो चर्चा है

मुबारक हो, बेटियो, तुम को ये भरम

मुबारक हो बेटियो तुम को ये भरम

इस बार न रस्सी है न कोई खूंटा है

प्यार का है कर्ज और सूद पक्का है.

       ये poem in hindi for lover उन जोड़ियों के लिए है जो एक दूसरे से सच्चा प्यार करते है और एक दूसरे को समजते है।

पहली नजर में प्यार

पहली नजर में प्यार का,

यह एहसास बड़ा ही प्यारा है

नयनों में छवि तुम्हारी है,

अधरों पर नाम तुम्हारा है

तुम सुबह की पहली किरण सी

तुम मधुमासी मस्त पवन सी

तुम फूलों में बसी सुरभि सी

निर्मल, धवल, अनंत गगन सी

तुम पावस की पहली फुहार

तुम मधुरितु में खिले सुमन सी

प्रिया मिलन को आतुर बहती

तुम हो नदी मुग्ध गगन सी

तुम कृति हो अनमोल अनूठी,

मनहरनी, जादूगरनी सी

तुम से मिल कर सत्य यह जाना,

अब दिल भी नहीं हमारा है

तुम ने नूपुर बांध दिए हैं

मेरी उम्मीदों के पांव में

नवीन ऊर्जा दौड़ रही है

मेरी समस्त शिराओं में

कल्पनाओं को पंख लगे अब

तुम ही तुम हो मन-भावों में

अब सुख ही सुख दिखता है

जीवन के उतारचढ़ावों में

सांसों में उग आई केसर,

बांहें आलिंगन को आतुर

रोमरोम है पुलकित मेरा,

जब से तुम ने स्वीकारा है.

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सब चलता है लोकतंत्र में poem on politics



हे मेरी तुम!
सब चलता है.

लोकतंत्र में,
चाकू – जूता – मुक्का – मूसल
और बहाना.

हे मेरी तुम!
भूल-भटक कर भ्रम फैलाये,
गलत दिशा में
दौड़ रहा है बुरा जमाना.

हे मेरी तुम!
खेल-खेल में खेल न जीते,
जीवन के दिन रीते बीते,
हारे बाजी लगातार हम,
अपनी गोट नहीं पक पाई,
मात मुहब्बत ने भी खाई.

हे मेरी तुम!
आओ बैठो इसी रेत पर,
हमने-तुमने जिस पर चलकर
उमर गँवाई.

poem on nature in hindi सबको प्रकृति से जोड़ने का काम करती है। हमे प्रकृति के बारे में अधिक जानने में मदत करते है।

पंचतत्त्व poem on nature in Hindi


मेरी देह से मिट्टी निकाल लो और बंजरों में छिड़क दो
मेरी देह से जल निकाल लो और रेगिस्तान में नहरें बहाओ
मेरी देह से निकाल लो आसमान और बेघरों की छत बनाओ
मेरी देह से निकाल लो हवा और कारख़ानों की वायु शुद्ध कराओ
मेरी देह से आग निकाल लो, तुम्हारा दिल बहुत ठंडा है

हम अपने प्रकृति का नाश करके खुदका नाश कर रहे है। जिसकी वजह से कई समस्या उत्पन हुए है और इस hindi poem on nature से हमे यही पता लग रहा है।

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3. सूखा hindi poem on nature


गये सूख सबके सब नदी-नाले-पोखर
वे भी जो जल भरने आये थे
सूख गये
सूखे ज्यों पेड़ हैं –
झिलमिल-झिलमिल करती
आगे बस रेत है.

अन्त नहीं, यह तो शुरुआत है
आगे भी रेत है जितनी हटाओ
फिर उतनी ही रेत है
रेत है रेत है रेत है
कभी और दुनिया यह, लगी नहीं थी
पहले इससे ज्यादा ख़ाली.

ये poem on beti in hindi दिल को झु जाने वाली poem है। पढ़िए और शेयर जरुर करे

तुमने उसमें मौक़ा देखा poem on beti in hindi

तुमने उसमें मौक़ा देखा,
अपनी हवस मिटाया.
तुमने उसमें माँस ही देखा,
नोच-नोच के खाया.
तुमने सोचा वो जली है,
आह! तुमने देश जलाया.
* * * *

धिक्कार है तुमपे कुत्सित-कायर-नीच,
तुमने उसका दुपट्टा खींच,
पूरे देश को खींच लिया,
मध्य युग के,
फिर से बीच.
* * * *

वो रावण ही था जिसने,
लंका में भी,
नारी को हाथ ना लगाया था!
तुम उसको जलाते हो,
ऐसी हिम्मत!
वो रावण यदि ज़िंदा होता,
यक़ीन मानो,
उसने तुम्हें जलाया था!

आज के समय में बेटी बचाना और बेटी पढ़ाना बहोत जरुरी है। और ये poem on beti bachao beti padhao in hindi बेटी की व्यथा को अच्छे से व्यक्त करती है।

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नहीं आना मुझे poem on beti bachao beti padhao in hindi

नज़र आता है डर ही डर,
तेरे घर-बार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा

यहाँ तो कोई भी रिश्ता
नहीं विश्वास के क़ाबिल
सिसकती हैं मेरी साँसें
बहुत डरता है मेरा दिल
समझ आता नहीं ये क्या छुपा है
प्यार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा

मुझे तू कोख में लाई
बड़ा उपकार है तेरा
तेरी ममता, मेरी माई
बड़ा उपकार है तेरा
न शामिल कर जनम देने की ज़िद
उपकार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा

उजाला बनके आई हूँ जहाँ से
मुझको लौटा दे
तुझे सौगंध है मेरी, यहाँ से
मुझको लौटा दे
अजन्मा ही तू रहने दे मुझे
संसार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा

नज़र आता है डर ही डर
तेरे घर-बार में अम्मा
नहीं आना मुझे इतने बुरे
संसार में अम्मा…

इस poem on women in hindi से हमे स्त्री की अहमियत जानने को मिलती है।

एक स्त्री जब उदास होती है! poem on women in hindi

एक स्त्री
जब उदास होती है..;
धीमी हो जाती है..
धरती के
घूमने की गति..!

एक स्त्री
जब मुस्कराती है..;
आसमान
थोड़ा झुक जाता है..!

एक स्त्री
जब हँसती है..
अनुचित हँसी;
महाभारत होता है..!

एक स्त्री की
निश्छलता पर..
सकुचाने लगती है;
भागीरथी..!

एक स्त्री
जब जिद करती है..
अपने अधिकार के लिए;
यमराज हार जाता है..!

एक स्त्री को
जब देनी पड़ती है
अपने व्रत की परीक्षा..,
एक गहरा प्रश्नचिन्ह लगता है..;
पुरुष के पुरुष होने पर..!

एक स्त्री
जब रोती है..;
धरती फट जाती है..!

निभाते हुए..
सभी रिश्तों को
बचाने की जुगत में..
एक स्त्री बँट जाती है..;
परमाणुओं में..!

एक स्त्री
जब प्रेम करती है..;
बस प्रेम करती है..!!!

short poem in hindi बहोत ही आकर्षक और भावनिक poem है

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इतने बड़े आँगन short poem in hindi

घरों के भीतर से जाते थे हमारे रास्ते
इतने बड़े आँगन
हर ओर बरामदे ही बरामदे
जिनके दरवाज़े खुलते थे गली में
उघर से धूप आती थी दिन के अन्त तक

और वे पेड़
जो छतों से घिरे हुए थे इस तरह कि
हम उन पेड़ों पर चढ़कर
किसी भी छत पर उतर जाते

थे जब हम बन्दर से भी ज्यादा बन्दर
बिल्ली से भी ज्यादा बिल्ली

हम थे कल गलियों में
बिजली के पोल को
पत्थर से बजाते हुए.

ये poems in hindi हमारे लिए बहोत खास है। क्योकि आज हम सब अपने अपने घर में बंद है पर हम दूर नहीं है।ये दिन भी जायेंगे और नया सवेरा होगा।

कोरोना poem in hindi


यही संकट रहा तो

यही संकट रहा तो ज़िन्दगी के दुख कौन बांटेगा
अकेलेपन से लड़ते आदमी के दुख कौन बांटेगा.

जहां पर दूरियां दिल में बहुत पहले से हों कायम
वहां पर पास रह कर आदमी के दुख कौन बांटेगा.

अभी तो हैं हवाओं की नमी में वायरस जिन्दा
अभी तो गले मिल कर भाइयों के दुख कौन बांटेगा.

यहां पर बंद सब कुछ काम हाथों में नहीं कोई
यहां भूखे औ प्यासे आदमी के दुख कौन बांटेगा.

अभी सब ‘अपने अपने अजनबी’ से नजर आते हैं
अभी अपनाइय्यत के साथ सुख-दुख कौन बांटेगा.

अकेला लड़ रहा है वायरस से वह अकेले में
कि इस तनहाई में बीमार का दुख कौन बांटेगा .

के जिस दुनिया में होंगी वायरस की खेतियां उसमें
तड़प कर मरने वालों के भला दुख कौन बांटेगा.

ये दुनिया क्या इसी दिन के लिए हमने बनाई है
न होगा आदमी तो आदमी के दुख कौन बांटेगा.
***

ये poem in Hindi हमारी एक कोशिश है। आपको अच्छी poems उपलब्ध करवाके देने की। तो अगर आपको ये poems अच्छे लगे हो तो शेयर जरूर करे और अपना कीमती सुझाव देना न भूले।

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