new moral stories in Hindi | motivational short moral stories in Hindi

motivational short moral stories in Hindi: हर किसी की कोई ना कोई कहानी जरूर होती है। और हर कहानी से हम समजते जाते है की क्या सही है, और गलत है। क्या करना है और क्या नहीं करना है। ऐसे ही कुछ कहनिया में आपके लिए लाया हु। जिससे आपको बहोत कुछ सिखने और समझने को मिलेगा।

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कलेक्टर

एक छोटे से गांव में सखुबाई नाम की औरत रहती थी । वो बहुत ही गरीब थी किराए के घर में रहती थी । उसके पति को गुजरे दो साल हो गए थे । उसका एक लड़का भी था जिसका नाम था राजेश ।राजेश पढ़ाई में बहुत ही होशियार था ।

पति के गुजरने के बाद घर चलाने की सारी जिम्मेदारी सखु बाई के कंधों पर आई थी । साथ में राजेश की पढ़ाई का बोझ भी था । सखु हमेशा सोचती कि उसका बेटा एक दिन बड़ा अफसर बनेगा।

सखुबाई जब काम करती तो राजेश भी उसके साथ जाता । सखुबाई लोगों के घर जाकर बर्तन मांजती तो कहीं खाना बना देती तो राजेश बैठे बैठे लोगों के घर आए अखबार को बड़े ध्यान से पढ़ता एक दिन जब राजेश अखबार पढ़ने लगा तो ।

एक मालकिन ने बड़ी कुदसिया से कहा अरे राजेश अखबार पढ़ के क्या तुम बड़े अफसर बन जाओगे। इससे अच्छा तो मां के काम में हाथ बटा । कम से कम उसे कुछ मदद तो हो जाएगी । इस पर राजेश बोला मुझे कलेक्टर बनना है ।

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हम किताबें नहीं ले सकते इसलिए ज्यादा ज्ञान के लिए मैं अखबार पढ़ता हूं । मालकिन बोली तुम और कलेक्टर शकल देखो अपनी और मालकिन जोर जोर से हंसने लगी । सखुबाई को ये बात बहुत बुरी लगी और वो दोनों वहां से चले गए ।

फिर सखु ने शादियों में रोटी बनाने का काम शुरू किया । वो अकेली ही 15 20 किलो की रोटियां बनाती थी । इसके लिए वो सुबह तीन बजे ही अपना काम शुरू कर देती थी । उसके साथ राजेश भी उठता था और मां को मदद करके अपनी पढ़ाई करता था ।


एक दिन अचानक मकान मालिक उनके पास आए और बोले क्या सखुबाई तुम और तुम्हारा बेटा तीन बजे ही उठ जाते हो और ये लाइट जलाते हो । बिजली का बिल ज्यादा आता है। तुम एक तो बिल ज्यादा दिया करो या फिर कमरा खाली कर दो । moral stories in hindi

और मकान मालिक गुस्से से वहां से चले गए । फिर राजेश ने लालटेन जलाई और पढ़ाई करने लगा । मां भी उस प्रकाश में रोटियां करने लगी । ऐसे ही राजेश ने अगले कुछ साल जी लगाकर पढ़ाई की और क्लास में हमेशा अव्वल आने लगा ।

राजेश की लगन देखकर अगली पढ़ाई के लिए उसके गुरुजी ने उसे दिल्ली जाने की सलाह दी और खुद खर्चा उठाने की जिम्मेदारी ली । राजेश तो 22 साल का हो गया था । फिर क्या था । राजेश दिल्ली चला गया और वहां खूब पढ़ाई की ।

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वो घंटों लाइब्रेरी में किताबें पढ़ता रहता । फिर एक दिन जब एग्जाम का टाइम आया । जाते जाते किसी गाड़ी से वो टकराया और जमीन पर गिर गया । उसके सिर और बाएं हाथ को चोट आई । अब वह सोचने लगा मेरे बाएं हाथ में चोट लग गई है और सिर से खून भी बह रहा है । इस हालत में अस्पताल जाऊं ।

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अगर अस्पताल गया तो मेरा पूरा साल बर्बाद हो जाएगा और मेरे लिए फिर परीक्षा देना मुमकिन नहीं । क्योकि फिर दिल्ली में रहने का मेरा खर्चा कौन उठाएगा । मेरे सिर्फ बाएं हाथ पर चोट लगी है पर दायां हाथ तो अभी ठीक है।

में इस हाथ से परीक्षा दूंगा और फिर राजेश वहां से सीधा परीक्षा केंद्र गया और परीक्षा दी । परीक्षा देने के बाद राजेश अस्पताल में भर्ती हुआ और इलाज करवाया । राजेश ने अस्पताल में भी पढ़ाई जारी रखी और इंटरव्यू अटेंड किया । फिर कुछ दिन के लिए राजेश मां के पास गांव वापस चला गया ।

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कुछ दिनों बाद रिजल्ट के दिन माने अखबार खरीद कर लाया और राजेश को परिणाम देखने को कहा । राजेश ने रिजल्ट देखा तो उसने जोर से चीख निकली । मां मैं पास हो गया । तुम्हारा बेटा अफसर बन गया । मैं कलेक्टर बन गया हु। यह सुनते ही मां की आंखों से आंसू आ गए और वो दोनों रोने लगे।

moral stories in Hindi: तो दोस्तों क्या समझे इस कहानी से कि हमें हमेशा अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए । दुनिया चाहे हम पर हंसे या मजाक उड़ाए लेकिन हमेशा अपने लक्ष्य का पीछा करना चाहिए कामयाबी जरूर मिलती है ।

गांव की बेटी a moral story in hindi

एक बार की बात है । काशीपुर नाम के एक गांव में जगन नाम का एक भिखारी अपनी बेटी गौरी के साथ रहता था । गौरी की मां का गांव में फैली महामारी के कारण देहांत हो गया था और जगन को ठीक से दिखाई नहीं देता था ।

इसी वजह से उसे कहीं काम नहीं मिलता और मजबूरन उसे पेट पालने के लिए अपनी बेटी गौरी के साथ भीख मांगना पड़ रहा था। लेकिन गौरी को भीख मांगना पसंद नहीं था । वह पढ़ना लिखना चाहती थी ।

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जब भी गौरी पिता के संग गांव के सेठानी के घर भीख मांगने पहुंचती तो वहां उनके बेटे राजू को पढ़ते लिखते देख उसे खुद के लिए बहुत बुरा लगता और ये देख सेठानी ताने देते हुए कहती । हरिया देख दरवाजे पर फिर से वही भिखारी आये है उन्हें कुछ भी देकर उन्हें भगा जल्दी से।

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गांव में एक भी अस्पताल नहीं है और अगर इन लोगो की महामारी मेरे बेटे राजू को लग गई तो मैं क्या करुँगी । ये सुन दोनों दुखी होकर वहां से चले गए । तब गौरी ने कहा पिताजी सारा गांव हमसे दूर क्यों भागता है । क्या हम बुरे लोग हैं।

तो पिताजी ने कहा नहीं बेटा बुराई तो हमारी गरीबी और उनकी सोच में है। पिताजी उपभोक्ता प्राथमिक इलाज के लिए मैं अस्पताल बनाउंगी। पिताजी ने कहा बेटी हमारे लिए तो दो वक्त की रोटी जुटाना ही बड़ा कठिन है ।

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ये सब तो बड़े लोगों के सपने हैं । काश मैं तुम्हारे लिए कुछ कर पाता । तभी एक औरत ने गौरी को पास बुलाया और कहा अरे ओ गौरी मैडम हमारा टॉयलेट साफ करोगी तो मैं तुम्हें कुछ रुपए दूंगी । गौरी ने उनकी बात मानी और उनका टॉयलेट साफ कर दिया ।

लेकिन गौरी को ये बात बहुत ही बुरी लगी । तभी गौरी ने ये फैसला कर लिया कि वह डॉक्टर बनेगी । गौरी ने अपने पिता को मंदिर के बाहर रहीम चाचा के पास बिठा दिया और वो खुद कई दिनों तक गांव में खिलौने बेचकर पैसे कमाने लगीं और फिर एक दिन गांव के शिक्षिका रेनू दीदी से मिलकर वो गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने जाने लगीं ।

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अब गौरी रोज स्कूल से आने के बाद खिलौने बेचती और पैसे कमाती और अपने पिता की देखभाल करती । गौरी रात रातभर जगकर पढ़ाई किया करती और हमेशा अच्छे अंकों से पास होती । गौरी की हिम्मत और सफलता देख सेठानी और अन्य गांव के लोग सभी हैरान थे और वो जगन और गौरी से जलने भी लगे थे ।

गौरी हर साल अच्छे अंकों से पास होती और शिक्षिका रेनू भी गौरी की पढ़ाई में खूब मदद करती । धीरे धीरे समय गुजरता गया और गौरी बड़ी होती गई ।

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उसने अपनी मेहनत और लगन से अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की और आगे डॉक्टर की पढ़ाई पढने के लिए कॉलेज में दाखिले के लिए इम्तिहान दिया और इम्तिहान में टॉप भी किया ।

ये खबर सुनकर गौरी के पिता और शिक्षिका रीनू दोनों बहुत खुश हुए । गोरी को डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए मुझे स्कालरशिप भी मिली लेकिन अब गौरी को अपने पिता को छोड़कर डॉक्टर की पढ़ाई के लिए शहर जाना था ।

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वो उदास हुईं तब रेनु ने कहा गौरी तू फिक्र न कर पिताजी को हम संभालेंगे। तू बस शहर जा और जल्दी ही डॉक्टर बन कर आना। गौरी पढ़ाई के लिए शहर चली गई । गुजरते समय के साथ वो अपने सपने की तरफ तेजी से कामयाबी के साथ बढ़ रही थी ।

कई दिनों तक उसकी कोई खोज खबर नहीं आई । कुछ साल बाद गांव में दुबारा महामारी की बीमारी तेजी से फैल गई और रेनू के पिता सहित सेठानी और उसका बेटा राजू सभी बहुत बीमार हो गए ।

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और नगर के एक छोटे से सरकारी अस्पताल में पड़े रहे। पर कई दिनों से कोई डॉक्टर नहीं आया । सब बहुत दुखी और उदास थे। भगवान से जिंदगी की प्रार्थना करने लगे तभी एक नर्स ने सभी को खबर दी ।

तुम लोग के लिए सरकार की तरफ से शाम को बड़ी डॉक्टर साहिबा आपका इलाज करने आने वाली हैं । ये खबर सुन गांववाले बहुत खुश हो गए । तभी हॉस्पिटल के सामने एक कार आकर रुकी और उसमें से एक डॉक्टर उतरी नगर सरपंच ने उन्हें माला पहनाकर उनका स्वागत किया ।

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जब वो अस्पताल के अंदर आई तो उसे देख सभी हैरान रह गए क्योंकि वो डॉक्टर कोई और नहीं बल्कि वही लड़की गौरी थी । गौरी ने अपने पिता के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और फिर उसने सभी गांववालों का इलाज करना शुरू किया । गौरी का इलाज सही कुछ दिनों में सभी ठीक हो गए।

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गौरी ने अपने पिता की आंखों का ऑपरेशन करवाकर उनकी रौशनी भी वापस लाई । गौरी की मेहनत लगन और सफलता की वजह से एक बार फिर सारा गांव महामारी से पूरी तरह मुक्त हो गया और सेठानी सहित बाकी गांववालों को अपनी गलती का अहसास हो गया ।

वो सभी गौरी को फूल मालाओं का हार पहनाकर उसके नाम का जयजयकार करने लगे और ये देख गौरी के पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

moral stories in Hindi: तो इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि अगर गौरी की तरह मेहनत लगन और दृढ़ निश्चय से किसी काम को किया जाए तो उसमें हमें कामयाबी जरूर मिलती है ।

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माँ moral story in Hindi

एक गांव में विमला नाम की एक गरीब औरत अपने बेटे रोशन और बहू गौरी के साथ रहती थी । विमला के पति का देहांत हो गया था जिससे सारी जिम्मेदारी उसके बेटे रौशन पर आ गई थी लेकिन गांव में रौशन को कोई काम न मिलने के कारण गरीबी और बेरोजगारी से उसकी मुसीबतें बढ़ती चली गई ।

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विमला की बहू गौरी बहुत ही स्वार्थी और लालची स्वभाव की थी । एक दिन उसने अपने पति से कहा अजी सुनिए अब यहां कुछ नहीं रखा है । हमें शहर चले जाना चाहिए तभी हमारे हालात सुधर पाएंगे वरना हमें भूखा ही मरना पड़ेगा ।

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तब रौशन बोला माँ यहां अकेली कैसे रहेगी तो गौरी बोली ओहो अब मां की चिंता मत कीजिए । जब आपको नौकरी मिल जाएगी तब मां को पैसे भेज दिया करेंगे। रोशन अपनी मां को अकेला छोड़ पत्नी गौरी के साथ शहर चला गया ।

कई महीने बीत जाने के बाद भी उसकी कोई खबर नहीं आई । बेटे और बहू के शहर चले जाने के बाद विमला पेट पालने के लिए दर दर भटकने लगी और भीख मांगकर अपना गुजारा करने को मजबूर हो गई।

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वो हमेशा अपने बेटे का लौटकर आने का इंतजार करती पर उनकी न तो कोई खबर आती और न ही उनकी तरफ से कोई पैसा। विमला मंदिरों और रेलवे स्टेशन पे भीख मांगने लगी पर उसे ज्यादा पैसे नहीं मिलते और कई दिन उसे भूखा ही सोना पड़ता ।

विमला की आवाज बहुत ही सुरीली थी और उसे गाने का शौक भी था इसलिए उसने गाना गाकर भीख मांगना शुरू कर दिया जिससे बाद में धीरे धीरे लोग विमला का गाना सुनने के लिए इकट्ठा होने लगे।

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विमला के गाने से लोगों का अच्छा मनोरंजन होता और विमला को भीख में थोड़े अच्छे पैसे मिल जाते थे ।

अब विमला रेलवे स्टेशन पर ही गाना गाती है और उसे दो वक्त खाने को भी मिल जाता । एक दिन विमला रेलवे स्टेशन पर बैठे गाना गा रही थी। तभी वहां एक सज्जन व्यक्ति जिसका नाम था आलोक वह विमला के पास आया और आलोक एक फिल्म डायरेक्टर था ।

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वह विमला को इतनी सुरीली आवाज में गाते हुए सुनकर हैरान रह गया । वह विमला के पास आकर बोला, माँ जी मैं आपका गाना सुना रहा हु। आप बहुत ही सुरीली गाती है । मैं चाहता हूं कि आ आप मेरी नई फिल्म में गाना गाए मुझे आपकी ही तरह एक नए आवाज की तलाश थी ।

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यह सुनकर विमला की आंखों में आंसू आ गए । आलोक विमला को अपने साथ मुम्बई शहर ले गया और विमला से अपने फिल्म में गाना भी गवाया और इसके बदले विमला को खूब सारे पैसे मिले । देखते ही देखते विमला का गाया हुआ गाना हर जगह खूब सुना जाने लगा और पसंद भी किया जाने लगा ।

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वो हर जगह खूब मशहूर हो गई । अब विमला की जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी थी । वो एक भिखारिन से मशहूर गायिका बन गई थी । उसे टीवी न्यूजपेपर में हर जगह दिखाया जाने लगा । एक दिन जब गौरी ने अपनी सास विमला को टीवी पर देखा तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गई । उसके मन में पैसे का लालच जाग उठा ।

उसने तुरंत ही अपने पति रौशन को ये बात बताई और बोली माँ जी टीवी पर आ रही है अब वो काफी मशहूर और अमीर बन चुकी हैं । कितने साल बीत गए हम माँ जीसे नहीं मिले । अब हमें उनके पास रहना चाहिए।

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आखिर हमारी सिवाय उनका है ही कौन । तब रौशन ने कहा हां तुम ठीक ही कहती हो । रौशन और गौरी दोनों विमला के पास पहुंचे जहां वो एक बड़े बंगले में रहती थी । सिक्योरिटी गार्ड ने दोनों को अंदर जाने से रोका ।

तब विमला ने अपने बेटे की आवाज सुनी और वो फौरन बाहर आई और अपने बेटे को देख विमला की आंखों में आंसू छलक पड़े । उसने फौरन अपने बेटे को गले से लगा लिया और रोती हुई बोली मेरा बेटा आज याद आयी तुझे अपनी मां की ।

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मैंने तुझे कितना तलाश किया । अपनी मां की ऐसी ममता और प्रेम को देखकर रौशन और गौरी दोनों को अपनी गलती का पछतावा हुआ और उन्होंने माफी मांगी और मां के लिए अपने बच्चों की खुशी से बढ़कर और कुछ भी नहीं होता है इसलिए विमला ने दोनों को माफ कर उन्हें गले से लगा लिया।


moral stories in Hindi: मां की खुशी से बढ़कर दुनिया में और कुछ भी नहीं । इसलिए हमें अपने स्वार्थ को त्याग करें अपने मां बाप को कभी अकेला और बेसहारा नहीं छोड़ना चाहिए ।

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